लखनऊ: 60 लाख के विवाद में दोस्त ने की व्यापारी की हत्या, 4 आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ के गुडम्बा में दोस्त ने 60 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर व्यापारी उमाशंकर सिंह की गला रेतकर हत्या कर दी। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद किए।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गुडम्बा थाना क्षेत्र में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। 60 लाख रुपये के व्यावसायिक लेन-देन को लेकर एक व्यक्ति की उसके ही दोस्तों ने चापड़ से गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से हत्या में प्रयुक्त हथियार, खून से सना कपड़ा और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया है।
घटना का पृष्ठभूमि
24 जून 2025 को ममता सिंह ने थाना गुडम्बा में शिकायत दी थी कि उनके पति उमाशंकर सिंह, जो अर्जुन इन्क्लेव स्थित मकान में किराए पर रहते थे, की गला रेतकर हत्या कर दी गई है। पुलिस ने IPC की धारा 103(1)/61 BNS और 4/25 आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर तत्काल जांच शुरू की।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस की जांच में CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर निम्न चार आरोपियों की पहचान हुई:
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संजय कुमार चौहान (36)
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शिवा सिंह उर्फ शिवराम सिंह (34)
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कविनंदन सिंह उर्फ छोटू (26)
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अभिनंदन सिंह (45)
आज सुबह 10:45 बजे पुलिस ने चारों को बेहटा फ्लाईओवर के पास से गिरफ्तार कर लिया।
बरामदगी का विवरण
चारों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने अतरौली गांव में बबूल की झाड़ियों से एक बैग बरामद किया, जिसमें थे:
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2 खून से सने चापड़
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1 सूजा (नुकीला औजार)
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1 नारंगी रंग का खून से सना कुर्ता
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1 घटना के समय पहना गया कुर्ता
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2 रेनकोट
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1 काला गमछा
इन साक्ष्यों के आधार पर आयुध अधिनियम की धाराएं और जोड़ी गईं।
हत्या का कारण: पैसा, अपमान और बदले की भावना
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक उमाशंकर सिंह ने संजय और शिवा को करीब 60 लाख रुपये उधार दिए थे। पहले सब सामान्य था, लेकिन समय के साथ उमाशंकर का व्यवहार बदल गया। वह शराब के नशे में गाली-गलौज करते और दोस्तों को नौकरों की तरह व्यवहार करते थे।
अपमान और रुपये न लौटाने के इरादे से चारों ने मिलकर हत्या की योजना बनाई और चापड़ से गला रेतकर उमाशंकर की हत्या कर दी।
पुलिस टीम व सराहनीय कार्रवाई
इस हत्याकांड का खुलासा क्राइम ब्रांच, सर्विलांस और थाना गुडम्बा की संयुक्त टीम ने किया। टीम में SHO, उप निरीक्षक, हेड कांस्टेबल और सिपाही शामिल थे।
पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की त्वरित और समन्वित कार्रवाई को चारों ओर सराहना मिल रही है।
यह घटना क्या दर्शाती है?
यह घटना न सिर्फ व्यवसायिक रिश्तों में विश्वास टूटने की भयावहता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अपमान और लालच किस कदर एक जघन्य अपराध को जन्म दे सकते हैं।
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