गोण्डा: आशा देव हॉस्पिटल में महिला की मौत, डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप
गोण्डा के आशा देव हॉस्पिटल में भर्ती गीता मिश्रा की दो ऑपरेशनों के बाद मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही और पैसे की मांग का आरोप लगाया। पढ़ें पूरा मामला।
गोण्डा | उत्तर प्रदेश — शहर के चर्चित आशा देव मेमोरियल सर्जिकल एंड मैटरनिटी हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। रविवार को जिले के कटरा बाजार थाना क्षेत्र के अशोकपुर बंजरिया गांव की रहने वाली गीता मिश्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।
इलाज की पूरी प्रक्रिया पर सवाल
परिजनों के अनुसार, गीता मिश्रा को बच्चेदानी की समस्या के चलते 3 जून को आईटीआई-कचहरी रोड स्थित आशा देव हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर देवेन्द्र मोहन शुक्ल की निगरानी में रात को पहला ऑपरेशन किया गया। लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद दोबारा ऑपरेशन किया गया।
दो ऑपरेशन, 27 टांके – फिर भी जान नहीं बची
दूसरे ऑपरेशन में महिला के पेट में करीब 27 टांके लगाए गए। हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन परिजनों को “सब ठीक है” का भरोसा दिया जाता रहा। 15 जून की सुबह करीब 5 बजे महिला की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि इलाज में लापरवाही के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन ने पैसे की लगातार मांग की और समय पर सही उपचार नहीं दिया।
पुलिस को दी गई तहरीर, लेकिन सुलह का आरोप
मृतका के पति इंद्र कुमार मिश्र ने नगर कोतवाली में डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ लिखित शिकायत दी, जिसमें लापरवाही और दबाव बनाकर पैसे लेने का आरोप है। हालांकि, परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पहुंचने के बाद पुलिस ने सुलह-समझौते का दबाव बनाया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
डॉक्टर का बचाव
आरोपों के जवाब में सर्जन डॉ देवेन्द्र मोहन शुक्ल ने सभी दावों को निराधार बताया और कहा कि उपचार में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
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