ओवैसी का केंद्र को सुझाव: कश्मीरियों को अपनाएं, पाकिस्तान को जवाब दें
ओवैसी का केंद्र को सुझाव: कश्मीरियों को अपनाएं, पाकिस्तान को जवाब दें
नई दिल्ली – एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद की स्थिति पर केंद्र सरकार को निशाना बनाते हुए कई अहम सुझाव दिए।
ओवैसी ने कहा कि कश्मीरी मुसलमानों ने इस हमले की खुलकर निंदा की है, और केंद्र सरकार के पास इस समय एक "ऐतिहासिक अवसर" है कि वह कश्मीरियों को साथ लेकर चले। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान का सामना करना ज़रूरी है, लेकिन कश्मीरियों को भी गले लगाना होगा। उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार दिए जाने चाहिए और देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरी छात्रों पर हमले बंद होने चाहिए।"
“सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से काम नहीं चलेगा”
ओवैसी ने पहलगाम में मारे गए नागरिक के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि "उस महिला की पीड़ा, जो अपने पति के शव के पास बैठी थी, उसे देखकर कोई भी भावुक हो जाएगा। ऐसे हमलों पर राजनीति करना अमानवीय है।"
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद के बावजूद, जब देश के नागरिकों पर हमला होता है, तो "हम सब एक साथ खड़े होते हैं।"
“युद्धविराम की घोषणा पीएम को करनी चाहिए थी”
ओवैसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्धविराम की घोषणा करना भारत की संप्रभुता के लिहाज से उचित नहीं है। "यह प्रधानमंत्री मोदी को करना चाहिए था, न कि किसी विदेशी नेता को," उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा।
“पाकिस्तान मानवता के लिए खतरा बन चुका है”
ओवैसी ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को प्रायोजित करता रहा है और अब यह देश मानवता के लिए खतरा बन चुका है।
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें किसी सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के तौर पर विदेश भेजा गया, तो वे वहां पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की सच्चाई दुनिया के सामने रखेंगे। "भारत ने दशकों से इस आतंकवाद का दर्द सहा है — जिया-उल-हक के दौर से ही मासूमों का कत्लेआम होता आ रहा है," उन्होंने कहा।
ओवैसी के बयान कश्मीर नीति, आतंकी हमलों की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर केंद्र सरकार की दिशा पर गहरे सवाल उठाते हैं। जहां एक ओर वे पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार से यह अपेक्षा भी रखते हैं कि वह कश्मीरियों के प्रति अपनापन दिखाए और आतंकवाद के खिलाफ एक समावेशी राष्ट्रीय नीति अपनाए।
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