केशव प्रसाद मौर्य को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, फर्जी डिग्री मामले में याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ फर्जी डिग्री और पेट्रोल पंप आवंटन मामले में दायर याचिका को खारिज किया। कोर्ट ने कहा – आपराधिक जांच की जरूरत नहीं।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से बड़ी कानूनी राहत मिली है। सोमवार को न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकल पीठ ने उनके खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई आपराधिक जांच की आवश्यकता नहीं है।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें मौर्य पर फर्जी शैक्षणिक डिग्री के इस्तेमाल और उसके आधार पर पेट्रोल पंप आवंटन का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता ने प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस जांच की मांग की थी।
हालांकि कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई ठोस या नया साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह सिद्ध हो सके कि केशव प्रसाद मौर्य ने जानबूझकर फर्जी डिग्री का उपयोग किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल शंका या आरोपों के आधार पर किसी नेता की छवि धूमिल नहीं की जा सकती।
मामले की पृष्ठभूमि:
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यह मामला पहले प्रयागराज की निचली अदालत में गया था, जहां से याचिका खारिज हो गई थी।
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इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई, लेकिन 300 दिनों की देरी के कारण उसे भी खारिज कर दिया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने जनहित में हस्तक्षेप करते हुए हाईकोर्ट को दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया था।
अब इस अंतिम सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिका को साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया है।
राजनीतिक प्रभाव:
यह फैसला न सिर्फ कानूनी तौर पर क्लीन चिट के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह मौर्य के राजनीतिक भविष्य को भी सुरक्षित करता है। गंभीर आरोपों से बाहर निकलने के बाद यह निर्णय उनके लिए बड़ी राहत साबित हुआ है।
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