सरकारी स्कूल विलय पर बवाल: AAP, बसपा, सपा और कांग्रेस ने खोला मोर्चा
उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विलय के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। लखनऊ में AAP ने प्रदर्शन किया, वहीं BSP, SP और कांग्रेस ने सरकार पर शिक्षा विरोधी फैसले का आरोप लगाया है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के विलय के फैसले के खिलाफ राज्यभर में विरोध तेज हो गया है। लखनऊ कलेक्ट्रेट पर आम आदमी पार्टी की ज़िलाध्यक्ष इरम के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। इरम ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा,
“हमें स्कूलों पर ताले नहीं, बच्चों के लिए तालीम चाहिए।”
प्रदर्शनकारियों ने योगी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और गरीब बच्चों से उनका हक छीनने का आरोप लगाया। "हमको मधुशाला नहीं पाठशाला चाहिए" जैसे नारे गूंजे। पार्टी ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की और कहा कि स्कूल बचाने की लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ी जाएगी।
शिक्षक संघ भी मैदान में
प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी मोर्चा खोलते हुए सोशल मीडिया अभियान और BSA कार्यालयों पर धरने की चेतावनी दी है। संघ ने कहा कि ‘पेयर्ड स्कूल’ योजना के नाम पर हजारों स्कूल बंद हो रहे हैं और प्रधानाध्यापकों के पद खत्म किए जा रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था चरमरा जाएगी।
राजनीतिक दलों का सरकार पर निशाना
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मायावती (बसपा अध्यक्ष) ने फैसले को गरीब-विरोधी और अव्यवहारिक बताया और कहा कि बीएसपी की सरकार बनने पर पुरानी व्यवस्था बहाल की जाएगी।
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अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष) ने स्कूल विलय को वंचितों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश बताया।
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरक्षण उल्लंघन और निजीकरण को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
रसोईयों और अभिभावकों में चिंता
संघ के अनुसार, हजारों रसोईयों की नौकरी खतरे में है। वहीं अभिभावकों ने छोटे बच्चों को 3-4 किलोमीटर दूर भेजने की समस्या और असुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है।
सरकार की सफाई
सरकार का कहना है कि छात्र संख्या कम होने पर पास के स्कूलों में विलय कर बेहतर संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। स्मार्ट क्लास, प्रशिक्षित शिक्षक और तकनीकी सुविधाएं एक ही जगह जुटाने की मंशा बताई गई है।
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