यूपी सरकार की 'एस्कॉर्ट अलाउंस' योजना: दिव्यांग बच्चों को मिलेगा ₹600 मासिक सहयोग
उत्तर प्रदेश सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक के गंभीर व बहु-दिव्यांग बच्चों को स्कूल आने-जाने में मदद के लिए ‘एस्कॉर्ट अलाउंस’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र बच्चों को 10 महीने तक ₹600 प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से दिए जाएंगे।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांग बच्चों की शिक्षा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘एस्कॉर्ट अलाउंस’ योजना की शुरुआत की है। अब कक्षा 1 से 8 तक के ऐसे गंभीर व बहु-दिव्यांग बच्चे, जो अकेले स्कूल नहीं जा सकते, उन्हें आने-जाने के लिए हर महीने ₹600 की आर्थिक सहायता मिलेगी। यह सहायता समग्र शिक्षा अभियान के तहत 10 माह तक दी जाएगी।
यह योजना दृष्टिहीन, बौद्धिक रूप से दिव्यांग, सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित, JE-AES प्रभावित, या अन्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए लागू की गई है। इसका उद्देश्य इन बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति को सुनिश्चित करना और अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम करना है।
13,991 बच्चों को मिलेगा लाभ, 839.46 लाख रुपये स्वीकृत
योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 13,991 पात्र बच्चों की पहचान की गई है। इसके लिए 839.46 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह योजना राज्य के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में लागू की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि 30 सितंबर 2025 तक योजना को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाए।
डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खातों में पहुंचेगी राशि
योजना के तहत प्रत्येक पात्र बच्चे को ₹600 प्रति माह की राशि Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से उनके या उनके अभिभावकों के खातों में भेजी जाएगी। भुगतान की यह प्रक्रिया प्रेरणा पोर्टल और समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी।
पात्रता की स्पष्ट शर्तें और तीन-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया
पात्रता हेतु आवश्यकताएं:
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40% या उससे अधिक की दिव्यांगता का प्रमाण पत्र
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विद्यालय में नियमित उपस्थिति
तीन-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया:
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प्रधानाध्यापक पात्र बच्चों की प्राथमिक पहचान करेंगे।
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खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) स्तर पर सत्यापन किया जाएगा।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अंतिम स्वीकृति देंगे।
इसके बाद, बच्चों का आधार और बैंक खाता PFMS पोर्टल से सत्यापित होगा और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि, “यह योजना दिव्यांग बच्चों के लिए न केवल एक सुविधा है, बल्कि शिक्षा तक समान पहुंच का संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है।”
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