PM मोदी के प्रगति तंत्र की 50वीं बैठक: सुशासन और समयबद्ध विकास का मजबूत मॉडल
प्रधानमंत्री के प्रगति तंत्र ने 50वीं बैठक पूरी की। बुनियादी ढांचा, आवास और शहरी विकास में समयबद्ध निगरानी से मिला बड़ा लाभ।
सक्रिय सुशासन और सरकारी योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने वाले प्रधानमंत्री के प्रमुख तंत्र प्रगति ने अपनी 50वीं बैठक पूरी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस तंत्र की शुरुआत नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में की थी, जिसका उद्देश्य बड़े प्रोजेक्ट्स की सीधी निगरानी और प्रशासनिक अड़चनों का त्वरित समाधान करना है।
प्रगति मंच के जरिए प्रधानमंत्री स्वयं महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा करते हैं। इस प्रत्यक्ष निगरानी प्रणाली के कारण परियोजनाओं में देरी, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण स्वीकृति और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसी समस्याओं का समय रहते समाधान संभव हो पाया है।
सहकारी संघवाद का मजबूत डिजिटल मॉडल
प्रगति ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़कर सहकारी संघवाद का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस मंच ने निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज किया है और परियोजनाओं की प्रगति में बाधा बनने वाले कारणों की स्पष्ट पहचान में मदद की है।
इसके साथ ही, जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी मजबूत हुई है, क्योंकि हर परियोजना की स्थिति की समीक्षा उच्चतम स्तर पर की जाती है।
शहरी परिदृश्य में बदलाव की कहानी
प्रगति की 50 बैठकों के सफर में शहरी विकास, आवास, परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति मिली है। इस विशेष श्रृंखला में आज हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि किस तरह आवास और ढांचागत विकास से जुड़ी पहलों ने देश के शहरी परिदृश्य को बदलने में अहम भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रगति मॉडल ने न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है, बल्कि विकास योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने में भी निर्णायक योगदान दिया है।
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