भरथना में जश्ने गौसुल आज़म का भव्य आयोजन, रूहानी माहौल में डूबी रही महफ़िल
भरथना में जश्ने गौसुल आज़म का भव्य आयोजन, रूहानी माहौल में डूबी रही महफ़िल
भरथना। जवाहर रोड़ स्थित बड़ी जामा मस्जिद, भरथना में शनिवार की रात नमाज़-ए-इशा के बाद जश्ने गौसुल आज़म का भव्य आयोजन बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ किया गया।
इस रूहानी महफ़िल में दूर-दूर से तशरीफ़ लाए उलमा-ए-किराम और नातख़्वान हज़रात ने शिरकत कर महफ़िल को रूहानियत से भर दिया। कार्यक्रम का आग़ाज़ कुरान की तिलावत से हुआ, जिसके बाद जलसे का संचालन हाफ़िज़ अज़ीम सभली ने किया। नातख़्वानों ने गौसे पाक की शान में दिल छू लेने वाली नातें पेश कीं — “डूबी भी हुई कश्ती भी दरिया निकाली है, यह नाम अदब से लो, यह नाम जलाली है” और “अल मदद पीराने पीर है” जैसी नातों से माहौल में रूहानी रंग घुल गया।
कर्नाटक से तशरीफ़ लाए हज़रत शर्फ़ुद्दीन शर्फ़ क़ादरी साहब ने अपनी तक़रीर में कहा कि “नमाज़ की पाबंदी हर मुसलमान पर फर्ज़ है, अल्लाह के वली हज़रत अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमतुल्लाह अलैह रात-रात भर रब की इबादत में मशगूल रहते थे।” वहीं मौलाना नाज़िम रज़ा शाहजहाँपुरी ने तक़रीर में फरमाया कि “मिस्कीन और यतीम को खाना खिलाना अल्लाह को पसंद है। जो इंसान अल्लाह की मखलूक की खिदमत करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इनाम देता है और उसके ईमान की हिफाज़त करता है।”
इस मौके पर मौलाना महमूद चिश्ती (इमाम मस्जिद सराय, भरथना) और मौलाना आरिफ़ रज़ा (इमाम मस्जिद बियारण, भरथना) की विशेष उपस्थिति रही। शायर-ए-इस्लाम मुषर्रफ़ रज़ा कनौजवी, मौलाना अज़ीमु्द्दीन बरकाती (लखीमपुर खीरी), हाफ़िज़-ए-क़ुरआन उस्मान रज़ा, अतीक रज़ा, मोइनस रज़ा, इरशाद रज़ा और साहिल रज़ा (भरथना) ने भी अपनी हाज़िरी से महफ़िल को रोशन किया।
कार्यक्रम की देखरेख ख़तीबी इमाम जामा मस्जिद मौलाना फ़हीम रज़ा ने की, जबकि व्यवस्था की निगरानी समर रज़ा, हसन रज़ा, हम्माद रज़ा और शहज़ादगान ने बखूबी निभाई। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने पहुँचकर इस मुबारक जलसे में शिरकत की और फज़ाइल-ए-गौसुल आज़म से अपने ईमान को रौशन किया।
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