बरेली: 200 लोगों को ठगने वाला रियल एस्टेट कारोबारी गिरफ्तार

बरेली में करोड़ों की ठगी कर फरार चल रहे श्री गंगा इन्फ्रासिटी के डायरेक्टर राजेश मौर्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा। जानिए पूरा मामला।

May 25, 2025 - 18:35
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बरेली: 200 लोगों को ठगने वाला रियल एस्टेट कारोबारी गिरफ्तार

बरेली– थाना बारादरी पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। करीब डेढ़ साल से फरार चल रहे श्री गंगा इन्फ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर और कथित ठग राजेश मौर्य को शनिवार को पीलीभीत बाईपास रोड स्थित चंद्रगुप्तपुरम कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया गया। मौर्य पर धोखाधड़ी, जालसाजी, चेक बाउंस और अन्य गंभीर धाराओं में दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं।

तकनीकी निगरानी से दबोचा गया आरोपी

पुलिस के अनुसार, राजेश मौर्य की गिरफ्तारी के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। उसके खिलाफ अदालत से कई बार गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके थे, लेकिन वह लगातार फरार बना रहा। बारादरी पुलिस ने सर्विलांस और तकनीकी निगरानी के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस की और उसे आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

कौन है राजेश मौर्य?

राजेश मौर्य मूल रूप से कुशीनगर जिले का निवासी है। वर्ष 2018 में उसने श्री गंगा इन्फ्रासिटी प्रा. लि. नामक एक रियल एस्टेट कंपनी शुरू की थी। बरेली के ग्रीन पार्क कॉलोनी में इसका मुख्यालय खोला गया और भुता थाना क्षेत्र में करीब 200 बीघा ज़मीन का एग्रीमेंट कर प्लॉटिंग प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया।

कंपनी ने प्लॉट के साथ-साथ रिटर्न इन्वेस्टमेंट स्कीम की पेशकश भी की, जिसमें मासिक भुगतान या 5 वर्षों में दोगुनी राशि लौटाने का वादा किया गया। कंपनी ने विभिन्न गांवों और मोहल्लों में करीब 200 शाखाएं खोलकर निवेशकों से भारी रकम जुटाई।

घोटाले का खुलासा और जनता की ठगी

कुछ ही समय बाद कंपनी निवेशकों को वादे के अनुसार भुगतान करने में विफल रही। जिन ग्राहकों को भुगतान मिला भी, उन्हें पूरी राशि नहीं मिली। सैकड़ों चेक बाउंस हुए और निवेशकों का करोड़ों रुपये फंस गया। विरोध-प्रदर्शन हुए और मौर्य के खिलाफ बरेली, दिल्ली और मथुरा में दर्जनों एफआईआर दर्ज कराई गईं।

इन धाराओं में दर्ज हैं केस

राजेश मौर्य के खिलाफ बरेली के विभिन्न थानों में IPC की धाराएं 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी), 409 (आपराधिक न्यासभंग), 120बी (षड्यंत्र), 504, 506, 353 और एनआई एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस) के तहत मामले दर्ज हैं। पुलिस ने बताया कि अन्य जिलों से भी केस ट्रांसफर हो सकते हैं, जिसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस की सख्त कार्रवाई जारी

एसएसपी के निर्देश पर अब अन्य फरार आरोपियों और सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए भी अभियान तेज कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जिन निवेशकों की राशि फंसी है, उनके बयान लिए जा रहे हैं।


राजेश मौर्य की गिरफ्तारी न सिर्फ पीड़ित निवेशकों के लिए राहत की खबर है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि लंबे समय तक फरार रहने के बाद भी कानून के शिकंजे से कोई नहीं बच सकता।

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